सांसद और विधायक की सैलरी कितनी होती है जानीय हिंदी में The Salary Of MP And MLA

By | अक्टूबर 1, 2021

सांसद और विधायक की सैलरी कितनी होती है, विधायको की वेतन कितनी होती है , MP And MLA The Salary Of Will Gets India , सांसद की सैलरी कितनी होती है , सांसद तथा विधायको को सैलरी कोन देता है, सांसद और विधायक के कार्य

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सांसद और विधायक की सैलरी कितनी होती है

सांसद और विधायक की सैलरी कितनी होती है

सांसद और विधायक की सैलरी – सांसद और विधायक की सैलरी कितनी होती है यह सवाल हर किसी के मन में उठता है कि अपने जिले के विधायक या सांसद कि सेलरी कितनी है और सांसदों तथा विधायको क्या-क्या कार्य करते है तो आज हम आपको इस आर्टिकल के माद्यम से सांसदों तथा विधायको कि सेलरी और कार्य कि पूरी जानकरी देगे साथ में सांसदों तथा विधायको को सरकार क्या-क्या सुविधा प्रदान करती है और सांसदों तथा विधायको बनने के लिए आपको क्या योग्यता होनी चाहिए इस कि पूर्ण जानकारी के लिए आप को आर्टिकल को पूरा पढना है

सांसदों तथा विधायको की सैलरी कितनी होती

सांसद और विधायक की सैलरी – दोस्तों हम अगर सांसद एवं विधायको की सेलेरी की बात करे तो उनकी सेलेरी में कोई खास परिवर्तन नही है देश की सरकार ने इन राजनेताओ की सेलेरी को सातवे वेतन में 2015 के बाद बढ़ा दी गई है इन विधायको तथा सांसंदो को सलारी के अलावा अपने क्षेत्र में कम करने एवं जनता को आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों पर कम करने के लिय बजट भी दिया जाता है अगर हम सम्पूर्ण भारत देश के विधायको तथा सांसंदो की सैलरी की बात करे तो तेलंगाना राज्य के सांसदों तथा विधायको की सलारी ज्यादा है

उसके बाद दिल्ली राज्य के विधायको की सैलरी आती है तो चलिय दोस्तों आज के इस आर्टिकल में हम आपको इन सांसदों तथा विधायको की सैलरी , कार्यभार , कार्यकाल , विशेषताए आदि की जानकारी को विस्तार से विवरण करेंगे इसलिय आप इस आर्टिकल को लास्ट तक जरुर पढ़े और सभी जानकारी को प्राप्त करे

सांसदों तथा विधायको की सैलरी कितनी होती के बारे में

सांसदों तथा विधायको की सैलरी – भारत देश के इन दो राजनेताओ की सैलरी के बारे में जाने तो उनकी सेलरी तथा राष्ट्रपति की सैलरी में कोई फर्क नही है एक चुनावी आंकड़े के अनुसार सांसद को सरकार द्वारा बेसिक सैलरी 1,00,000 रुपया प्रति महीने के हिसाब से दिया जाता है इसके साथ साथ 45,000 रुपया की राशी निर्वाचन क्षेत्र द्वारा चुनाव प्रचार का भत्ता भी मिलता है इनकी कुल सैलरी के बारे में देखे तो करीब 1,50,000 रुपया की राशी सरकार द्वारा वितरण की जाति और हम विधायक की सैलरी के बारे में जाने तो इनको कई राज्यों में तो २,50,000 रुपया तक की सैलरी मिलती है

विधायको की सैलरी में सबसे ज्यादा सेलरी देने वाली सरकार तेलंगाना राज्य की सरकार द्वारा वितरण किया जाता है और उसके बाद अगर विधायको की सैलरी की बात करे तो दिल्ली राज्य के विधायको की सेलरी भी २,1,000 रुपया मिलती है जो भारत के सभी और बचे हुए राज्यों से ज्यादा वितरण की जाती है

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आर्टिकल किसके बारे में है भारत के सांसदों तथा विधायको की सैलरी के बारे में
सांसदों की सैलरी कितनी होती है बेसिक वेतन 1 लाख रु तथा निर्वाचन आयोग द्वारा 45,000 रु
विधायक की सैलरी 2,50,000 रुपया
सांसद का कार्यभार कितने वर्ष का होता है 5 साल का
विधायक का कार्यकाल 5 वर्ष का
अधिकारिक वेबसाइट india.gov.in

एक राज्य का सांसद किस चुनाव प्रक्रिया द्वारा बनाया जाता है

सांसद और विधायक की सैलरी – एक राज्य का सांसद का चुनाव भी मला की भांति किया जाता है इसमें जनता द्वारा अलग अलग चुनाव चिन्हों पर जनता अपना मतदान कर जो योग्य उम्मीदवार है उनको अगले आने वाले 5 साल के लिय सांसद न्युक्त किया जाता है सांसद का कार्य है की अपने क्षेत्र के लोग जो ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रो दोनों को आर्थिक एवं सामाजिक जो भी गतिविधिया है उनको सुधारना है

आज हम एक राजस्थान राज्य के सांसद की बात करे तो राजथान राज्य में सांसदों की संख्या 25 है जिस पार्टी के ज्यादा सांसद होंगे उस पार्टी द्वारा देश का प्रधानमंत्री न्युक्त किया जाता है उसके बाद केंद्र सरकार द्वारा इन सांसदों को उनके क्षेत्र के योग्य किसानो तथा गरीबो के हित के लिय जो भी आर्थिक तथा सार्वजनिक कार्य होंगे उसका बजट केंद्र सरकार द्वारा वितरण किया जाता है

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एक विधायक की चुनावी प्रक्रिया किस प्रकार होती है

सांसद और विधायक की सैलरी – सभी राज्यों के विधायक की बात करे तो विधायक प्रत्येक जिले की तहसील पर बनाया जाता है उनका चुनाव मतदान उनकी तहसील की जनता द्वारा किया जाता है इस चुनाव की भी अलग अलग सत्ता की पार्टिया होती है उनके बिच जनता चुनाव करती है उसके बाद जनता ने जिस विधायक की पार्टी को ज्यादा पसंद किया है उनको विजयी घोषित कर दिया जाता है विधायक की जिम्मेदारी होती है की अपनी तहसील के क्षेत्रो में ग्रामीणों तथा शहरी दोनों प्रदेश वासियों को आर्थिक एवं सामाजिक जो भी परिस्थतिया है उनका निपटारा करवाना उनका पहल कर्तव्य होता है

इस तहसील के विधायको द्वारा ही एक राज्य का मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है अगर हम राजस्थान राज्य की बात करे तो राजस्थान में विधायको की सीट 200 है जिस पार्टी के ज्यादा विधायक होंगे उनका ही मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाता है और उसी मुह्क्य्मंत्री द्वारा ही राज्य की तहसीलों के लिय क्षेत्रो में कम करने का कार्यभार इन विधायको को सोम्पा जाता है

सांसद की सैलरी कितनी होती है

सांसद और विधायक की सैलरी – अगर हम सांसद की वेतन की बात करे तो हर राज्य के सांसदों को लग अलग वेतन मिलता है लेकिन बेसिक सैलरी है वो सभी राज्यों के सांसदों को समान रूप से मिलते है सांसद की सैलरी साधारण रूप से 1,00000 रुपया मिलती है मगर इस बेसिक सैलरी के आलावा 45 ,000 रुपया चुनाव निर्वाचन आयोग द्वारा दिया जाता है

अगर सांसद की कुल मिलकर वेतन देखा जाए तो करीब 1,50 000 रुपया मिलती है और इसके आलावा अपने क्षेत्रो में कम करने के लिय जनता की सेवा करने के लिय 1 करोड़ से 4 करोड़ रुपया का बजट के रूप में हर साल वितरण किया जाता है ताकि अपने जिले के सभी क्षेत्रो में जरूरत का कोई भी कार्य हो चाहे आर्थिक सहायता राशी वितरण करना या किसी गरीब परिवार को पक्के मकान की सुविधा जैसी समस्याओ का हल करने के लिय केंद्र सरकार द्वारा वितरण किया जाता है

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विधायक की सैलरी कितनी होती है

सांसद और विधायक की सैलरी – विधायक जिले की एक तहसील पर बनाया जाता है तहसील का चुनाव मतदान तहसील की जनता द्वारा जो भी पार्टियों द्वारा उम्मीदवार खड़ा होता है उनको बना दिया जाता है अगर हम एक विधायक की वेतन के बारे में बात करे तो विधायक की सलारी तो करीब 88,000 रुपया होती है मगर कुछ और भी भत्ते होते है उन सब को मिलाए तो सांसद के ऊपर ही उनकी सैलरी होती है

अगर हम सम्पूर्ण भारत देश के विधायको की बात करे तो एक मिडिया रिपोर्ट के अनुसार तेलंगाना राज्य के विधायको की सैलरी सबसे ज्यादा होती है तेलंगाना राज्य के विधायको को राज्य सरकार २,50,000 रुपया वितरण करती है उसके बाद अगर सबसे ज्यादा वेतन देने वाला राज्य दिल्ली है उनके राज्यों के विधायको को राज्य सर्कार द्वारा २,1,000 रुपया सैलरी के रूप में राज्य सरकार वितरण करती है

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विधायक के कार्य – विधायक की सैलरी

  • विधायक (MLA) का सबसे महत्वपूर्ण कार्य कानून बनाना है।
  • जैसा कि भारत के संविधान – सातवीं अनुसूची (अनुच्छेद 246) द्वारा परिभाषित किया गया है, विधायकों के पास सूची I
  • राज्य सूची) और सूची III (समवर्ती सूची) में सभी वस्तुओं पर कानून बनाने का कर्तव्य है।
  • इन वस्तुओं में से कुछ पुलिस, जेल, सिंचाई, कृषि, स्थानीय सरकारें, सार्वजनिक स्वास्थ्य, तीर्थयात्राएँ, दफ़नाने के मैदान आदि हैं।
  • कुछ वस्तुएँ जिन पर संसद और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं वे हैं शिक्षा, विवाह और तलाक, वन, जंगली जानवरों का संरक्षण। और पक्षी।

सांसद के कार्य – सांसद की सैलरी

(1)संसद की दोनों सभाओं को बुलाने और उनका सत्रावसान करने की तिथियां,लोक सभा का विघटन, संसद के समक्ष राष्ट्रपति का अभिभाषण करना ससाद का कार्य होता है
(2) दोनों सभाओं में विधायी और अन्य सरकारी कार्य आयोजन तथा समन्वय;
(3) सदस्यों द्वारा सूचित किए गए प्रस्तावों पर चर्चा के लिए संसद में सरकारी समय का नियतन;
(4) संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले विभिन दलों और ग्रुपों के नेताओं और सचेतकों के साथ सम्पर्क

(5) विधेयकों संबंधी प्रवर और संयुक्त समितियों के सदस्यों की सूचियां;
(6) सरकार द्वारा गठित समितियों और अन्य निकायों पर संसद सदस्यों की नियुक्ति;
(7) विभिन्न मंत्रालयों के लिए संसद सदस्यों की परामर्शदात्री समितियों का कार्यचालन;
(8) संसद में मंत्रियों द्वारा दिए गए आश्वासनों का कार्यान्वयन;
(9) गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों और संकल्पों पर सरकार का रूख;

(10) संसदीय कार्य संबंधी मंत्रिमण्डल की समिति को सचिवालयिक सहायता;
(11) प्रक्रिया और अन्य संसदीय मामलों में मंत्रालयों को सलाह;
(12) संसदीय समितियों द्वारा की गई सामान्य रूप में लागू होने वाली सिफारिशों पर मंत्रालयों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई का समन्वय;
(13) रोचक स्थानों के सरकार द्वारा प्रायोजित संसद सदस्यों के दौरे;
(14) संसद सदस्यों के स्वत्वों, विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों संबंधी मामले;

(15) संसदीय सचिव-कार्य;
(16) सम्पूर्ण देश में विद्यालयों/कालेजों में युवा संसद प्रतियोगिताओं का आयोजन;
(17) अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन का आयोजन;
(18) संसद सदस्यों के सरकार द्वारा प्रायोजित शिष्टमंडलों का दूसरे देशों के साथ आदान-प्रदान;
(19) लोक सभा में प्रक्रिया और कार्य-संचालन नियम के नियम 377 के अधीन तथा सभा में विशेष उल्लेखों के माध्यम से उठाए जाने वाले मामलों के संबंध में नीति का अवधारण और अनुवर्ती कार्रवाई;

(20) मंत्रालयों/विभागों में संसदीय कार्य करने संबंधी निदेशिका ।
(21) संसद अधिकारी वेतन और भत्ता अधिनियम, 1953,(1953 का 20);
(22) संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954,(1954 का 30);
(23) संसद में विपक्षी नेता वेतन और भत्ता अधिनियम, 1977,(1977 का 33);
(24) संसद में मान्यताप्राप्त दलों और ग्रुपों के नेता और मुख्य सेचतक (सुविधाएं) अधिनियम, 1998 (1999 का 5)

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