प्रधानमंत्री न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 2020-21 एमएसपी क्या है किसानो को क्या लाभ मिलता है MSP

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MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य सरकार द्वारा किसानो के हित के लिए फसल का एक मूल्य तय किया जाता है जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कहा जाता है हर वर्ष सरकार हर फसल का एक मूल्य तय करती है उस मूल्य में किसान अपनी फसल सरकार को बेच सकते है अगर सरकार द्वारा तय मूल्य से अधिक कोई व्यपारी किसान फसल का मूल्य दे रहा है तो किसान अपनी फसल बेच सकता है चलिय यहा जानते है इस साल कि क्या MSP तय कि गई है व MSP के क्या लाभ है आदि जानकारी

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MSP क्या हुई – न्यूनतम समर्थन मूल्य

भारत सरकार देश केसभी किसानो के लिए एक MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य तक करती है किसान कि फसल का ताकि किसान को उसकी फसल का उचित दाम किसान को मिल सके जैसे सरकार ने इस बार 2020-21 का गेहू न्यूनतम समर्थन मूल्य 1925 रु तय किया है अब अगर किसान के पास गेहू है और कोई इसे नहीं खरीद रहा है तो किसान 1925रु प्रति क्युन्टल के हिसाब से अपना गेहू सरकार को बेच सकता है यानी यह एक तय मूल्य इतने रूपए में सरकार को किसान कि फसल लेनी ही पड़ेगी अगर MSP सरकार इस लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी करती है अगर कोई फसल कम होती है तो उसका दाम बढ़ जाता है और अगर फसल ज्यादा हो जाती है तो उसका दाम घट जाता है इसी लिए को कोई नुकसान ना हो और अगर कोई व्यपारी नहीं मिले तो किसान अपनी फसल सरकार को बेच सकते है

न्यूनतम समर्थन मूल्य शुरू कब हुआ

वर्ष 1957 में केंद्र सरकार ने खाद्य-अन्न जांच समिति (Food-grains Enquiry committee) का गठन किया। इस समिति ने कई सुझाव दिये लिए उससे फायदा नहीं हुआ। तब सरकार ने अनाजों की कीमत तय करने के बारे में सोचा। इसके लिए वर्ष 1964 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने अपने सचिव लक्ष्मी कांत झा (एलके झा) के नेतृत्व में खाद्य और कृषि मंत्रालय (अब ये दोनों मंत्रालय अलग-अलग काम करते हैं) ने खाद्य-अनाज मूल्य समिति (Food-grain Price Committee) का गठन किया। प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का मत था कि किसानों को उनकी उपज के बदले कम से कम इतने पैसे मिलें कि उनका नुकसान ना हो। तब देश के कृषि मंत्री थे चिदंबरम सुब्रमण्यम।

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योजना का नामMSP न्यूनतम समर्थन मूल्य
लोकेशनभारत
टाइपप्रधानमंत्री
उद्देश्यफसल का मूल्य स्थिर रखना व वर्धि करना
इस पोस्ट मेंMSP क्या है , किसने शुरू कि , इसके लाभ क्या है आदि जानकारी
शुरू हुआ24 दिसंबर 196

प्रधानमंत्री ने जारी किया 2020-21 का MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य )

मोदी सरकार ने इस बार किसानो के हित घोषणा कि है जिसमे रबी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए एमएसपी में की गयी भारी वृद्धि। न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और अपनी पसंद की मंडी चुनने की आजादी, किसानों के लिए ये ऐतिहासिक क्षण हैं। यानी सरकार ने द्वारा किया है कि किसानो कि MSP में आने वाली सभी फसल सरकार ख़रीदे तय मूल्य पर और किसान किसी भी मंडी में अपनी फसल बेच सकते है इसकी आजादी भी किसानो को दी गई है

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2020-21 का MSP बढ़ा

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी कृषि सुधार से संबंधित विधेयक पास हो गये। विपक्ष से लेकर किसान तक इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। इन विधेयकों को लेकर किसानों के मन में सबसे बड़ा डर यह है कि अब उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ नहीं मिलेगा। विधेयकों में एमएसपी की बात नहीं है, जबकि देश के कृषि मंत्री के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बार-बार कह रहे हैं कि MSP की सुविधा पहले जैसे ही रहेगी। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम भी सरकार से एमएसपी पर सवाल पूछ रहे हैं। आखिर यह एमएसपी है क्या? क्या सच में किसानों को इससे फायदा होता है? और सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या किसानों को एमएसपी मिलती भी है? तो आइये एमएसपी का इतिहास, भूगोल और गणित समझते हैं वह भी एक दम सरल शब्दों में।

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